Print गोपी कृष्ण tweet on a t-shirt

gopimaliwal twitter avatar
गोपी कृष्ण

@gopimaliwal

क्षणे रुष्टा: क्षणे तुष्टा: रुष्टा तुष्टा क्षणे-क्षणे। अव्यवस्थित चित्तानाम् प्रसादोऽपि भयंकर:।। जिनका मन अव्यवस्थित रहता है अर्थात पल पल बदलता रहता है उनकी दोस्ती व उनसे बैर दोनों ही कष्टप्रद होते हैं। ऐसे लोगों से दूर के सम्बन्ध ही हितकर है।

3
3
गोपी कृष्ण tweet's preview
gopimaliwal twitter avatar
गोपी कृष्ण

@gopimaliwal

क्षणे रुष्टा: क्षणे तुष्टा: रुष्टा तुष्टा क्षणे-क्षणे। अव्यवस्थित चित्तानाम् प्रसादोऽपि भयंकर:।। जिनका मन अव्यवस्थित रहता है अर्थात पल पल बदलता रहता है उनकी दोस्ती व उनसे बैर दोनों ही कष्टप्रद होते हैं। ऐसे लोगों से दूर के सम्बन्ध ही हितकर है।

3
3